तीन तलाक पर अध्यादेश के खिलाफ कोर्ट पहुंचा मुस्लिम संगठन

एक साथ तीन तलाक को अपराध बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश पर एक मुस्लिम संगठन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुन्नी मुस्लिमो के संगठन ने इस अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। इस संगठन का कहना है कि सरकार ने बिना कोई स्टडी या इस प्रथा के प्रसार का आकलन कराए यह कदम जल्दबाजी में उठाया है।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अध्यादेश पर स्टे लगाने की मांग करते हुए आरोप लगाया हे कि यह कानून असंवैधानिक और मनमाना है। दलील दी गई है कि एक बार में तीन तलाक को अब तक कानूनी मान्यता नहीं मिली थी और ऐसे में दंडित करने का प्रावधान रखने की कोई जरूरत नहीं थी। अगर इसका मकसद किसी नाखुश शादी में मुस्लिम पत्नी की सुरक्षा करना है तो कोई भी इस बात पर भरोसा नहीं करेगा कि यह सुनिश्चित करने के लिए पति को 3 साल के लिए जेल में डाल दिया जाए और इसे गैरजमानती अपराध बना दिया जाए।

इससे पहले तीन तलाक पर मोदी सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल चुकी है। केंद्र सरकार को अब इस बिल को 6 महीने में पास कराना होगा। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी। यह अध्यादेश अब 6 महीने तक लागू रहेगा। इससे पहले लोकसभा से पारित होने के बाद यह बिल राज्यसभा में अटक गया था। कांग्रेस ने संसद में कहा था कि इस बिल के कुछ प्रावधानों में बदलाव किया जाना चाहिए।